सीएचजेयू ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात, सौंपा ज्ञापन, सभी पत्रकारों के मान्यता कार्ड व पेंशन जारी रखने की मांग

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न्याय परिक्रमा न्यूज़ चंडीगढ

दैनिक, सप्ताहिक, पाक्षिक, मंथली सभी अखबारों, टीवी व डिजिटल मीडिया के सभी पत्रकारों को मिले मान्यता

सीएचजेयू ने सीएम से की पत्रकार पेंशन योजना व प्रेस मान्यता के लिए जारी नई अधिसूचना वापस लेने की मांग

चंडीगढ़, (अच्छेलाल), चंडीगढ़ एंड हरियाणा जर्नलिस्ट यूनियन (सीएचजेयू) ने मुख्यमंत्री नायब सिंह से मुलाकात कर पत्रकारों की मांगों को उनके समक्ष रखा और एक ज्ञापन सौंपा। सीएचजेयू ने मुख्यमंत्री से सांघ्य, दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मंथली छपने वाले मध्यम, लघु व स्थानीय समाचार पत्रों, टीवी व डिजिटल मीडिया के पत्रकारों को पे्रस मान्यता कार्ड को लेकर पेश आ रही दिक्कतों का उल्लेख करते हुए पहले की तरह सीए रिर्पोट पर मान्यता देने की मांग की और मान्यता प्रदान करने व पेंशन योजना के लिए जारी नई अधिसूचना की शर्तों को गैर-तर्कसंगत बताते हुए अधिसूचना को वापस लिए जाने की मांग की है। सीएचजेयू के अध्यक्ष राम सिंह बराड़, प्रदेश चेयरमैन बलवंत तक्षक ने मुख्यमंत्री नायब सिंह को दिए ज्ञापन में कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा पत्रकारों के लिए 10 हजार महीना पेंशन को बढ़ाकर 15 हजार करते समय जो अधिसूचना जारी की है, उसमें कुछ शर्तें ऐसी जोड़ी गई हैं, जो तर्कसंगत नहीं है। प्रतिनिधिमंडल में ललित धीमान, अख्तर फारूखी, पुनीत भास्कर, जगदीश असीजा, राजेश सलूजा, विनोद शर्मा, रविशंकर शर्मा, एचएस चहल, जगवीर, घनश्याम भी शामिल थे। सीएचजेयू प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री नायब सिंह को पगड़ी व शाल पहनाकर उनका सम्मान भी किया गया।सीएचजेयू ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि 14 नवंबर, 2023 की अधिसूचना को वापस लिया जाए। सीएचजेयू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पत्रकारों को कर्मचारियों की तरह कैशलैस मेडिकल सुविधा देने का ऐलान किया था। अभी तक पत्रकारों को कैशलैस मेडिकल कार्ड नहीं मिले हैं। सीएचजेयू ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सभी पत्रकारों को यह सुविधा देते हुए पत्रकारों के कैशलेस मेडिकल कार्ड जल्दी बनवाए जाएं और पत्रकारों की निशुल्क बस सुविधा पर लगी किलोमीटर सीमा हटाने सहित पत्रकारों की अन्य लंबित सभी मांगे भी जल्दी लागू करवाएं। सीएचजेयू ने कहा कि विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना अनुसार परिवार के सिर्फ एक सदस्य को ही पेंशन मिल सकेगी। यानि अगर पति व पत्नि दोनों पत्रकार हैं तो उनमें अगर पति को पहले पेंशन शुरू हो गई तो पत्नि को पेंशन नहीं मिलेगी। पुराने नियमों में ऐसी कोई पाबंदी नहीं थी। इसके अलावा पुराने नियमों में यह प्रावधान था कि अगर पेंशन पाने वाले पत्रकार का निधन हो जाता है, तो उसके जीवन साथी (पत्नि अथवा पति) को पूरी पेंशन मिलेगी। यानि उस समय पत्रकार का निधन होने पर उसके जीवन साथी को पूरी 10 हजार रूपए महीना पेंशन मिलती थी। नए नियमों के अनुुसार अब उनके लिए पेंशन 10 हजार से बढक़र 15 हजार होने की बजाय घटाकर 7,500 रूपए कर दी गई है। इन नियमों में एक यह भी प्रावधान किया है कि किसी पत्रकार के खिलाफ कोई भी मामला दर्ज होने पर उसकी पेंशन बंद कर दी जाएगी, यह शर्त भी न्यायसंगत नहीं है। इसके अलावा भी पेंशन प्रदान करने के नियमों को सरल करने की बजाय अब और ज्यादा कड़े व सख्त कर दिए हैं। नए नियमों में यह भी प्रावधान किया है कि पेंशन पाने वाले पत्रकारों के लिए पीपीपी कार्ड जरूरी है। पेंशन पाने वाले चंडीगढ़ व अन्य स्थानों पर रह रहे पत्रकारों के पीपीपी कार्ड बन नहीं रहे हैं। सीएचजेयू प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह ने पत्रकारों की मांगों व उन्हें पेश आ रही दिक्कतों को ध्यान से विस्तारपूर्वक सुना और इस संबंध में उनका रवैया बेहद सकारात्मक रहा।

ब्यूरों रिपोर्टः कुमार योगेश/अच्छे लाल(चंडीगढ)

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