इस सम्वत्सर का नाम कालयुक्त है, जिससे कि लोक में अशान्ति का वातावरण रहेगा : श्रीनिवासाचार्य

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न्याय परिक्रमा न्यूज़ चंडीगढ

पंचकूला, (अच्छेलाल), श्रीमुक्तिनाथ वेद विद्याश्रम संस्कृत गुरुकुल माता मनसा देवी परिसर, पंचकूला में नव संवत्सर मनाया गया जिसमें गुरुकुल के कुलाचार्य ने सभी विद्यार्थियों के साथ बड़े ही हर्षोल्लास के साथ प्रातःकालीन भगवान सूर्य का स्वागत एवं पूजा अर्चना की तथा गुरुकुल के ब्राह्मण बटुकों ने प्रातः काल सन्ध्या, हवन आदि नित्यकर्म कर पूज्य गुरूदेव जी के साथ नवरात्र के प्रथम दिवस कलश स्थापन कर दुर्गासप्तशती, श्रीसूक्त आदि कर वातावरण को निर्मल बनाया। श्रीनिवासाचार्य जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारतीय संस्कृति में सबसे महत्वपूर्ण तिथि है। “ब्रह्म पुराण” में उल्लेख है – चैत्र के महीने में ब्रह्मा ने इसी दिन ब्रह्मांड का निर्माण करना प्रारम्भ किया, भारतीय महान् गणितज्ञ भास्कराचार्य ने इसी शुभ तिथि पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिनों, महीनों और वर्षों की गणना करके प्रथम भारतीय कैलेंडर की रचना की। आध्यात्मिक मनीषियों की मान्यता है कि यह नववर्ष चैत्र नवरात्र से प्रारम्भ होता है, सनातन धर्म में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को स्वयंसिद्ध एवं अमृततिथि माना गया है। यानी वर्षभर का सबसे उत्तम दिन। यही नहीं श्रीहरि विष्णु ने सृष्टि के प्रथम जीव के रूप में इसी दिन प्रथम मत्स्यावतार लिया था। त्रेतायुग में भगवान् श्रीराम व द्वापरयुग में सम्राट युधिष्ठिर ने इसी दिन राजसत्ता संभाली थी। चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर इसी दिन विक्रमी संवत् का शुभारंभ हुआ था। इस समय वायुमंडल में दैवीय शक्तियों के स्पंदन अत्यधिक सक्रिय होते हैं। इसलिए इस समय सच्चे हृदय से श्रद्धा भक्ति से की गयी छोटी सी साधना भी साधक को चमत्कारी नतीजे दे सकती है। हम सभी सनातनी नववर्ष का स्वागत करने के साथ पथभ्रांत लोगों को भूल सुधारने को प्रेरित करें ताकि हमारी भावी पीढ़ी भारत की इन अमूल्य परम्पराओं का निर्वहन करें। सम्वत्सर के विषय में जानकारी देते हुए स्वामी जी ने कहा कि कलियुग की सम्पूर्ण आयु 432000 है, जिसमें कि 5125 वे वर्ष में आज हम प्रवेश किए हैं। राजा विक्रमादित्य के द्वारा स्थापित संवत् जिसे विक्रमी संवत् के नाम से जाना जाता है उसके भी 2081वें वर्ष में तथा शालिवाहन शक के द्वारा स्थापित शक संवत् के 1946वें वर्ष में आज हमारा प्रवेश है। इस सम्वत्सर का नाम कालयुक्त रहेगा, जिससे कि मनुष्य तथा लोक में अशान्ति का वातावरण रहेगा। संवत्सर का राजा मंगल तथा मन्त्री शनि है। दोनों के स्वामी हनुमान् जी है। अतः सभी बटुकों तथा आचार्यों ने विश्व शान्ति तथा कल्याण हेतु गुरुकुल प्रांगण में सुन्दरकाण्ड का पाठ किया। साथ ही स्वामी जी ने कहा कि आज से गुरुकुल में प्रारम्भ हुए पूजन, हवन तथा पाठ का क्रम नौ दिनों तक नियमित रूप से रहेगा, जिसमें सभी ब्राह्मण बटुक गुरुकुल के सभी आचार्यों के साथ इस क्रम को पूरा करेंगे। इस कार्यक्रम में गुरुकुल परिवार के सभी आचार्य विद्यार्थी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

ब्यूरों रिपोर्टः कुमार योगेश/ अच्छे लाल/संजीव कुमार(चंडीगढ)

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